गोलगप्पों के ये सच जानकर आपको हो जाएगी इनसे नफरत!

गोलगप्‍पे का नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है। चटाखेदार मसाला पानी, उबले आलू मटर से भरे गोल-गोल गोलगप्पों को बच्‍चे से लेकर बड़े सभी बहुत शौक से खाते हैं।

  चटपटे पानी से भरे इन गोलगप्‍पों को हर अवसर के मेन्‍यू में शामिल किया जाता है। इन्हें पानी पुरी, गुपचुप, फुचका और फुचकी भी कहा जाता है यह सूजी से भी बनाये जाते है और आटे से भी।   ये जायकेदार गोलगप्पे भारत के कई राज्यों में खाये जाते हैं और इन्हें हर जगह अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। साथ ही इन्हें परोसने का तरीका भी हर जगह अलग-अलग ही होता है।        
  • गोलगप्‍पे के अलग-अलग नाम
  दिल्ली शहर मे बिना सूजी के गोलगप्पे खाए और बिना चटपटा पानी पिए खरीददारी अधूरी लगती है। वहीं यह मुंबई में पानी पुरी के नाम से जाने जाते है और कोलकाता मे फुचके। इसके अलावा गुजरात के कुछ हिस्सों में इन्हें पकौड़ी भी कहा जाता है। यहां इसमें सेव और प्याज भी डाली जाती है। इसका पानी पुदीना और हरी मिर्च के पेस्ट से तैयार किया जाता है जो गाढ़ा होता है। चटक मसाले वाला पानी गोलगप्पे में डाल कर खाने का मजा ही कुछ और है लेकिन इसको बनाने की विधि शायद आप नहीं जानते हों। लेकिन आज हम आपको इसके बनाने का तरीका बताने वाले हैं, जिसको देखकर शायद आप गोलगप्पे खाना छोड़ दें और आपके मुंह में जो गोलगप्पों को देखकर पानी आ जाता है वह भी आना बंद हो जाएगा।  
  • गोलगप्‍पे के पीछे की सच्‍चाई
  जी हां गोलगप्पों के पीछे छिपी एक ऐसी सच्चाई जो अगर आपको पता चल जाये तो शायद आप अगली बार गोल गप्पे खाने की हिम्मत न कर सकें। और ऐसा देखकर ये तो पक्का है कि आपके मुंह में पानी नही आएगा लेकिन हां उबकाई जरूर आ सकती है। तो देर किस बात की आइए जानें क्‍या है वह सच्‍चाई।   दरअसल हर गली मोहल्ले में बिकने वाले इस स्‍वादिष्‍ट गोलगप्पे को जिस आटे से तैयार किया जाता है उसे गूंथने के लिये काफी समय और मेहनत लगती है। इसे हाथों से गूंथना थोड़ा मुश्किल होता है इसलिए इसे बनाने वाले कारीगर इसे जमीन पर रखकर पैरों से गूंथते हैं। जी हां गोलगप्पों के पीछे छिपी एक ऐसी सच्चाई जो अगर आपको पता चल जाये तो शायद आप अगली बार गोल गप्पे खाने की हिम्मत न कर सकें। और ऐसा देखकर ये तो पक्का है कि आपके मुंह में पानी नही आएगा लेकिन हां उबकाई जरूर आ सकती है। तो देर किस बात की आइए जानें क्‍या है वह सच्‍चाई।   दरअसल हर गली मोहल्ले में बिकने वाले इस स्‍वादिष्‍ट गोलगप्पे को जिस आटे से तैयार किया जाता है उसे गूंथने के लिये काफी समय और मेहनत लगती है। इसे हाथों से गूंथना थोड़ा मुश्किल होता है इसलिए इसे बनाने वाले कारीगर इसे जमीन पर रखकर पैरों से गूंथते हैं।  

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